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आपने भी रखा हुआ है बैंक लॉकर में सोना-चांदी तो अब बतानी होगी कीमत, सरकार बना सकती है नियम

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अगर आपका भी बैंक में लॉकर है और आपने अपने उस लॉकर में सोने या हीरे के आभूषण या अन्य कोई कीमती वस्तु रख रखी है तो यह खबर आपके लिए ही है. दरअसल आपको बता दें कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने केंद्र सरकार को बैंक के लॉकर में रखे बहुमूल्य वस्तुओं के खुलासे को अनिवार्य करने का सुझाव दिया है. इसके साथ ही उन्होंने सरकार का ध्यान बैंक के लॉकर में जमा कीमती वस्तुओं के नुकसान को लेकर देनदारी तय करने की और भी किया है. हरियाणा के CM मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि ऐसा करने से बैंक लॉकर किराए पर लेने वालों के लिए बीमा पॉलिसी आसानी से हो जाएगी.

सीएम मनोहर लाल खट्टर ने वित्त मंत्री पीयूष गोयल को लिखे पत्र में कहा है कि अगर किसी कारण से इसे अव्यवहारिक माना जाता है तो कम से कम उन ग्राहकों को खुलासा करने का एक विकल्प जरूर दिया जा सकता है. यह विकल्प बैंकों और सरकार को दावों से जल्दी निपटने में काफी मददगार होगा. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह एक बड़ा कदम है. ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक ने अभी तक इस तरह के नुकसान का आकलन करने के लिए कोई भी नीति नहीं बनाई है.

वही सीएम खट्टर ने यह भी कहा कि इससे काले धन को रोकने और वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही यह भारत सरकार के अभियान के अनुरूप भी होगा. वही सीएम खट्टर ने आगे कहा कि बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो कि अपना कीमती सामान अपने बैंक लॉकर में रखते हैं और उसे बिल्कुल सुरक्षित मानते हैं. लेकिन फिर भी वास्तविक तथ्य तो यह है कि प्राकृतिक आपदा या फिर अपराधिक कृत्य के कारण हुए कीमती सामानों के नुकसान के लिए बैंक बिल्कुल भी उत्तरदायी नहीं है.

दरअसल आपको बता दें कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक की सुरक्षित जमा बॉक्स (लॉकरों) से बेशकीमती वस्तुओं की चोरी या फिर लूट पर कोई भी मुआवजा नहीं मिलता. ऐसा इसलिए क्योंकि लॉकर संधि उन्हें सभी देनदारी से मुक्त कर देती है. इस बात का खुलासा एक आरटीआई आवेदन में हुआ था. वहीं इसके बाद आरटीआई आवेदक ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग में इस बात की भी गुहार लगाई थी. उसने लॉकर सुविधा के मामले में बैंकों के बीच गुटबंदी और गैर प्रतिस्पर्धात्मक पद्धतियों का भी आरोप लगाया था. वही आरटीआई आवेदक ने आयोग से यह भी कहा था कि आरटीआई के आवेदन में रिजर्व बैंक ने यह जवाब दिया है कि उसने इस संबंध में कोई भी स्पष्ट दिशा निर्देश जारी नहीं किए हैं और ना ही ग्राहकों को पहुंचने वाले नुकसान के मूल्यांकन के लिए कोई नीति तैयार की गई है.

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