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राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों को रिहा करने को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा यह

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केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को जवाब देते हुए कहा कि राजीव गांधी हत्याकांड के साथ दोषियों को रिहा करने का तमिलनाडु सरकार का वह प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है. अगर इन 7 दोषियों को रिहा कर दिया जाता है तो इसके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नतीजे काफी बुरे होंगे. इन दोषियों को रिहा करने से खतरनाक परंपरा शुरू हो सकती है.

वहीं इस पूरे मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस नवीन सिन्हा, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने की. तमिलनाडु सरकार ने 2 मार्च 2016 को केंद्र को पत्र लिखकर यह कहा था कि वह राजीव गांधी हत्याकांड के साथ दोषियों को रिहा करने का फैसला कर चुकी है, लेकिन वही सुप्रीम कोर्ट के 2015 के आदेश के मुताबिक उन सातों दोषियों को रिहा करने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी भी होना जरूरी है. इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 23 जनवरी 2018 को सरकार से 3 महीने में फैसला करने के लिए कहा था. वही सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र ने कहा कि राजीव गांधी हत्याकांड की जांच कर चुकी सीबीआई भी उन दोषियों को रिहा करने के फैसले के विरोध में हैं. इस हत्याकांड के सातों दोषी 27 साल से जेल में बंद हैं.

नलिनी श्रीहरन

ये हैं वो सात दोषी

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तमिलनाडु के पेरंबदुर में 21 मई 1991 को एक रैली में बम धमाके के जरिए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी. लिट्टे आतंकी धनु ने राजीव गांधी के पास जाकर खुद को बम से उड़ा दिया था. इस मामले में 28 जनवरी 1998 को नलिनी श्रीहरन को मौत की सजा सुना दी गई थी. वही बाद में राज्य सरकार ने उसकी सजा को उम्र कैद में बदल दिया था. वही इस मामले में मुरुगन, पेरारिवलन, संथन, रॉबर्ट पायस, जयाकुमार और रविचंद्र को भी दोषी करार दिया गया था. यह सभी आरोपी जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे हैं.

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