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मुकेश अंबानी ने अपने बेटे की शादी के लिए होटल या महल नहीं बल्कि चुना उत्तराखंड का ये मंदिर

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रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी के बेटे आकाश अंबानी और हीरा कारोबारी रसेल मेहता की बेटी श्लोका मेहता की ग्रैंड सगाई सेलिब्रेशन के बाद अब हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर इस नए जोड़े की शादी कहां और कैसी होगी. वही अब आकाश और श्लोका की शादी को लेकर यह चर्चाएं भी हो रही है कि मुकेश अंबानी मध्य हिमालय में स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर में अपने बड़े बेटे आकाश के विवाह की कुछ रस्मों को पूरा कर सकते हैं. इस मंदिर को शादी के लिए तैयार किया जा रहा है. आपको बता दें कि इसी साल मार्च के महीने में रुद्रप्रयाग में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसे वेडिंग डेस्टिनेशन घोषित कर दिया था. वही इस मंदिर को लेकर मान्यता यह भी है कि उत्तराखंड की वादियों में बसे इसी मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की भी शादी हुई थी.

दरअसल इस मंदिर को लेकर यह मान्यता है कि भगवान भोले शंकर ने हिमालय के मंदाकिनी क्षेत्र के त्रियुगीनारायण में माता पार्वती से विवाह किया था. और इस बात का प्रमाण है यहां जलने वाली अग्नि की ज्योति, जो कि अब से नहीं बल्कि त्रेतायुग से लगातार चल रही है. वही कहा यह भी जाता है कि भगवान भोले शंकर ने माता पार्वती से इसी ज्योति के समक्ष विवाह के फेरे लिए थे. उस वक्त से लेकर अब तक यहां अनेकों जोड़े विवाह बंधन में बंधे हैं. वहीं लोगों का कहना यह भी है कि यहां शादी करने से दांपत्य जीवन एकदम सुखी व्यतीत होता है. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि त्रेतायुग का यह शिव-पार्वती के विवाह का स्थल रुद्रप्रयाग जिले के सीमांत गांव में त्रियुगीनारायण मंदिर के रूप में आज आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है.

देश के सबसे बड़े उद्योगपति अंबानी परिवार का केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के साथ ही मध्य हिमालय में स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर से काफी पुराना रिश्ता रहा है. जी हां अब से करीब 40 साल पहले साल 1978 में धीरूभाई अंबानी ने अपने दोनों बेटों के साथ त्रियुगीनारायण मंदिर में आकर भगवान का आशीर्वाद भी लिया था. यहां भगवान के दर्शन और उनकी पूजा अर्चना करने के बाद ही धीरूभाई अंबानी केदारनाथ दर्शन करने के लिए गए थे.

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त्रियुगीनारायण मंदिर रुद्रप्रयाग से करीब 80 किलोमीटर दूर गौरीकुंड के पास स्थित है. अब से करीब 5 दिन पहले रिलायंस ग्रुप की 4 सदस्य टीम त्रियुगीनारायण मंदिर पहुंची थी. उन्होंने मंदिर की लोकेशन के साथ-साथ यहां पर रहने वाले गढ़वाल मंडल विकास निगम के बंगले की भी निरीक्षण की पूरी जानकारी ली थी.

पौराणिक कथा

हिंदू धर्म के पौराणिक ग्रंथों के अनुसार पर्वतराज हिमाकत या हिमावन की पुत्री थी. यहां पार्वती के रूप में सती का पुनर्जन्म हुआ था. पार्वती ने शुरू में अपने सौंदर्य से भगवान शिव को खूब रिझाना चाहा, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई. लेकिन वही त्रियुगीनारायण मंदिर से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित गौरीकुंड कठिन ध्यान और साधना से उन्होंने भगवान शिव का मन आखिर जीत लिया. यहाँ आने वाले जो भी श्रद्धालु त्रियुगीनारायण मंदिर जाते हैं, वह श्रद्धालु गौरीकुंड के भी दर्शन जरूर करते हैं. वही पौराणिक ग्रंथों में बताया गया है कि भगवान शिव ने पार्वती के समक्ष केदारनाथ के मार्ग में पड़ने वाले गुप्तकाशी में विवाह का प्रस्ताव रखा था. इसके बाद ही माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह त्रियुगीनारायण गांव में मंदाकिनी सोन और गंगा के मिलन स्थल पर पूर्ण हुआ.

इसके साथ ही आपको यह भी बता दें कि यहां और भी कई बड़ी हस्तियां शादी कर चुकी हैं. जी हां यहां पर

उत्तराखंड के राज्य मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत
टीवी कलाकार कविता कौशिक
आईएएस अपर्णा गौतम
उत्तराखंड के पहले बैच के पीसीएस टॉपर ललित मोहन रयाल व रशिम रयाल

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