Loading...

नहीं मिली नौकरी तो शुरू कर दिया अपना बिजनेस, अब कमा रही हैं 1.60 लाख रुपए महीना

0 35

बहुत सी ऐसी महिलाएं होती हैं जो कि अक्सर अपने घर और परिवार का ख्याल रखने के चक्कर में अपने करियर को पूरी तरह से नजरअंदाज कर देती हैं. लेकिन आज हम आपको मिलाने वाले हैं हरियाणा की जिंद की रहने वाली सुनीला जाखड़ से. सुनीला ने अपनी पढ़ाई को पूरा करने के बाद नौकरी पाने की पूरी कोशिश की, लेकिन नौकरी नहीं मिल पाई. नौकरी ना मिल पाने के कारण सुनीला ने हार नहीं मानी. कुछ करने की चाहत और अपनी एक पहचान बनाने की ख्वाहिश में उन्होंने अपने एक बिजनेस की शुरुआत कर दी और आज की तारीख में सुनीला अपने उस बिजनेस को सफलतापूर्वक चलाने के साथ-साथ अच्छी खासी कमाई भी कर लेती हैं, तो चलिए जानते हैं आखिर कैसे नौकरी ना मिलने पर सुनीला ने अपने बिजनेस को शुरू किया.

सुनीला ने मनी भास्कर से हुई बातचीत के दौरान बताया कि एग्रीकल्चर में बीएससी करने के बाद उन्होंने नौकरी के लिए एक नहीं बल्कि कई जगह आवेदन किया, लेकिन उन्हें कहीं भी नौकरी नहीं मिल पाई. नौकरी ना मिल पाने की वजह से वह बिल्कुल भी निराश नहीं हुई और उन्होंने अपना खुद का बिजनेस करने की सोची. बिजनेस करने के लिए सुनीला ने करनाल स्थित इंडियन सोसाइटी ऑफ एग्रीबिजनेस प्रोफेशनल्स के तहत एग्री-क्लीनिक और एग्री-बिजनेस को ज्वाइन कर लिया. कोर्स पूरा हो जाने के बाद सुनीला ने अपना खुद का बिजनेस शुरू कर दिया और आज की तारीख में सुनीला के बिजनेस का सालाना टर्नओवर 60 लाख रुपए से भी ज्यादा का है.

सुनीला ने करीब 2 महीने की ट्रेनिंग के दौरान एपीएरी (मधुमक्खियों के पालने का स्थान) का दौरा किया था. यहां का दौरा करने के बाद सुरीला ने मधुमक्खी पालने के बिजनेस करने के बारे में सोच लिया. वहीं उन्होंने बताया कि यह बिजनेस परिवारिक था इसमें काफी ज्यादा जानकारी होने की वजह से इस बिजनेस को शुरू करना भी काफी अच्छा लगा. वही उनका यह भी कहना है कि किसी और तरह के छोटे-मोटे बिजनेस की तुलना में मधुमक्खी पालन भी काफी अच्छा और किफायती बिजनेस है.

Loading...

अपने बिजनेस की शुरुआत को लेकर सुनीला ने बताया कि उन्हें अपने इस बिजनेस को शुरू करने के लिए 2 लाख रुपए का इन्वेस्टमेंट करना पड़ा. उन्होंने अपने बिजनेस को शुरू करने के लिए हरयाणा हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट से 50 पेटी सब्सिडी पर खरीदी. इसके बाद मधुमक्खी खरीदी और फिर तेजस एपीएरी की शुरुआत हुई और आज की तारीख में तेजस एपीएरी मधुमक्खी पालने का बॉक्स बनाने, शहद प्रोसेसिंग और ट्रेनिंग सेंटर की सुविधा भी प्रदान करता है.

अपने बिजनेस की कमाई को लेकर सुनीला ने बताया कि शहद, बीकीपिंग बॉक्स, हनी प्रोसेसिंग एंड ट्रेनिंग से उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर 60 लाख रुपए से भी ज्यादा का है. इसके लिए सुनीला ने करीब 20 किसानों के ग्रुप को मिलाकर बीकीपर पंजीकृत कराया हुआ है. इसके अलावा सुनीला ग्रामीण किसानों से मिलकर उनकी बी बॉक्स उपलब्ध कराने के साथ फ्री में ट्रेनिंग भी देती हैं. शहद बनने के बाद वह फिर उनसे खरीदती हैं और फिर उसे अपने ब्रांड से उन्हें बाजार में बेच देती हैं.

सुनीला ने बताया कि वह अपने इस बिजनेस से सालाना 20 लाख रुपए तक की कमाई आसानी से कर लेती हैं. वहीं उन्होंने यह भी बताया कि वो अब अपने ब्रांड को विदेश में बेचने के बारे में भी सोच रही हैं और जल्द ही वह इसके लिए कुछ कंपनियों के साथ करार करने वाली हैं.

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.