Loading...

क्या आप जानते हैं कि मां लक्ष्मी किस वजह से दबाती है भगवान विष्णु के पैर…..

0 63

जितनी श्रद्धा के साथ हम भगवान विष्णु व भगवान भोले शंकर की पूजा करते हैं, उसी श्रद्धा के साथ हम देवी लक्ष्मी और माता पार्वती की भी पूजा करते हैं. धन की देवी लक्ष्मी जी को ना केवल मंदिरों में बल्कि हर घर में पूजा जाता है. लोग अपने परिवार में सुख-समृद्धि को बनाए रखने के लिए माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने में लगे रहते हैं और दिन-रात उनकी पूजा आराधना करते हैं. दिवाली के त्यौहार पर खास तौर पर मां लक्ष्मी का ही पूजन किया जाता है.

लेकिन इसी सबके बीच आप लोगों ने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि इतनी पूजनीय व सम्माननीय होने के बावजूद भी लक्ष्मी जी की किसी भी तस्वीर में वह भगवान विष्णु के साथ ही होती हैं, तो वो हमेशा उनके चरणों में ही बैठी नजर आती है. क्या कभी आपने इस बात को सोचा है कि आखिर इसका कारण क्या हो सकता है या फिर अपने पति के पैर दबाना तो पत्नी का धर्म होता है. शायद आपने इसी वजह से इस बात के ऊपर ध्यान नहीं दिया होगा.

आपको बता दें कि माता लक्ष्मी भगवान विष्णु के चरणों में ऐसे ही नहीं बैठती हैं. इसका बहुत ज्यादा महत्व है और इस सब से जुड़ी एक कथा भी काफी प्रचलित है तो चलिए जानते हैं उस कथा के बारे में.

Loading...

मां लक्ष्मी अपने पति विष्णु जी की बेहद प्रिय हैं वह उनका काफी ज्यादा सम्मान भी करते हैं. ऐसे में माता लक्ष्मी को भगवान विष्णु के पैर दबाते हुए देखना थोड़ा अजीब जरूर लगता है.

यह है कथा

दरअसल इस कथा को माता लक्ष्मी ने नारद मुनि को सुनाया था, क्योंकि नारद मुनि को हर एक बात को जानने की उत्सुकता काफी होती है. और इस बात की जानकारी तो हम सभी को है. नारद मुनि ने अपनी इसी उत्सुकतावश एक बार माता लक्ष्मी से पूछ लिया कि आप भगवान विष्णु के चरणों को क्यों दबाती हैं?

माता लक्ष्मी ने दिया यह उत्तर

माता लक्ष्मी ने बड़ी ही सहजता से नारद मुनि को इस प्रश्न का जवाब देते हुए बताया कि मनुष्य से लेकर देवता तक सभी को ग्रह अच्छी या बुरी तरह से प्रभावित करते हैं. उनके द्वारा श्री हरि के पैर दबाने से इन ग्रहों का बुरा प्रभाव खत्म हो जाता है, इसलिए वह अपने श्री हरि के पैरों को दबाती हैं.

कैसे हैं यह मुमकिन

दरअसल आपको बता दें कि एक स्त्री के हाथों में देवताओं के परम गुरु बृहस्पति निवास करते हैं. वही बताया जाता है कि पुरुषों के पैर में दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य का निवास होता है. ऐसे में जब पत्नी अपने पति के पैरों को दबाती है तो ग्रहों के दुष्प्रभाव से बचने के साथ ही धन के योग भी बन जाते हैं.

माता लक्ष्मी का भगवान विष्णु के चरणों के समीप होने को लेकर एक और कारण भी है. दरअसल यह दूसरी कथा माता लक्ष्मी की बहन अलक्ष्मी से जुड़ी हुई है. माता लक्ष्मी की बहन अलक्ष्मी बिल्कुल उनके विपरीत बिखरे बाल, खतरनाक आंखों व नुकीले दांत वाली थी.

एक बार हुआ कुछ ऐसा

माता लक्ष्मी की बहन अलक्ष्मी अक्सर ही उनसे मिलने के लिए जाया करती थी. मगर वह अपनी बहन से मिलने अक्सर तभी जाया करती थी जब माता लक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ हो और कुछ निजी पल एक साथ बिता रहे हों.

एक बार की बात है जब अलक्ष्मी अपनी बहन के पास उनसे मिलने के लिए पहुंची. उस समय माता लक्ष्मी अपने प्रभु के पैर दबा रही थी, तभी अलक्ष्मी ने तर्क दिया कि मेरी पूजा अर्चना ना मेरा पति करता है ना कोई और करता है, इसलिए मैं वहीं पर रहूंगी, जहां तुम रहोगी.

माता लक्ष्मी को अपनी बहन की इस हरकत पर काफी ज्यादा क्रोध आ गया और उन्होंने अपनी बहन को श्राप दे दिया कि तुम्हारे पति मृत्यु के देवता हैं. जहां जहां पर गंदगी, जलन, दुर्भावना, आलस्य जैसी नकारात्मक पसरी होगी. वही पर तुम्हारा वास होगा.

माता लक्ष्मी अपनी बहन अलक्ष्मी को हमेशा ही अपने आप से दूर रखना चाहती हैं. इसलिए वह अपने पति के पैरों के पास बैठ कर उनकी सफाई करती रहती हैं. इसी वजह से हमें माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए अपने घर से लक्ष्मी को दूर करना होता है यानी कि हमें गंदगी व बुरे विचारों से अपने आपको कोसों दूर रखना चाहिए.

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.