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देख लीजिए ‛बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान की कैसे चिकित्सक ने उड़ाई धज्जियां

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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के बारे में तो आपने काफी कुछ सुना होगा और इस अभियान पर सरकार भी काफी गौर कर रही हैं, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मामले के बारे में बताने वाले हैं जहां ‛बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान की धज्जियां उड़ा दी गई. दरअसल पश्चिम चंपारण जिले के स्थानीय मित्रा चौक व उतर वारी पोखरा के समीप मानवता को शर्मसार करके रख देने वाला व दिल को दहला देने वाला एक दृश्य नजर आया. यह मानवीय समाज के ऊपर एक काला धब्बा है. बुधवार या गुरुवार की पहली सुबह बिन ब्याही मां या बेटी से नफरत करने वाली माता ने अपने गर्भ में पल रहे 6 माह या लगभग 9 माह के भ्रूण की हत्या करवाकर उसे कुत्तों का खाना बना दिया. आपको शहर के हर चौराहे पर मुख्यतः जहां चिकित्सक का नर्सिंग होम है. वहां पर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान वाले बड़े-बड़े पोस्टर आपको नजर आएंगे. वहीं पर मानवता को शर्मसार कर देने वाली इस घटना को अंजाम दिया जा रहा है.

चिकित्सक वह होता है जो नया जीवन देता है और हमारे समाज में चिकित्सक को भगवान का रूप माना जाता है. एक चिकित्सक गरीब, असहाय मरीज का दुख कम करके उसे एक नया जीवन दे देता है और जब दूसरी तरफ एक चिकित्सक इस तरह के कार्य को करें तो उसे क्या कहें उसे भगवान कहें या फिर एक शैतान कहें. इस पूरे मामले में जहां जितना चिकित्सक दोषी है उतने ही दोषी वह माता-पिता भी हैं जिन्होंने इस कुकृत्य हृदय विदारक घटना को अंजाम दिया. आखिरकार वह वक्त कब आएगा जब बेटियों के लिए फैलती जा रही यह नफरत कम होगी. वह बेटी किसी की मां है, किसी की बहन, किसी की पत्नी है बेटी के एक नहीं बल्कि अनेकों रूप होते हैं. फिर भी ना जाने क्यों हम इंसान ऐसा कर रहे हैं. बेटियों को लेकर हमेशा समाज में ना जाने क्यों ऐसा किया जाता है. ना जाने क्यों बेटियों को हमेशा पैदा होने से पहले मार दिया जाता है.

अगर इस समाज में लोगों की बिल्कुल ऐसी ही मानसिकता रही तो इंसान को रसातल पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगने वाला. समाज के लोगों को सबसे पहले अल्ट्रासाउंड चलाने वाले लोगों को एक आईना दिखाना चाहिए, यह वही लोग हैं जो कि लिंग पहचान कर कन्या भ्रूण हत्या को बढ़ावा दे रहे हैं. इन्हीं के द्वारा लिंग पहचान किए जाने के बाद कन्या की हत्या कर दी जाती है.

पर ना जाने वह लोग ऐसा क्यों भूल जाते हैं कि उसी कन्या के रूप से उन्होंने जन्म लिया है लेकिन फिर भी वह इस बात को नजरअंदाज करके इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा देते रहते हैं. जिस धरती मां की हम दिल से पूजा करते हैं उसी धरती मां की गोदी में हम कन्या की हत्या कर देते हैं. जिन लोगों की ऐसी वाहियात मानसिकता है. ऐसे लोगों को प्रशासन की तरफ से कड़ी से कड़ी सजा दी जाए और सजा ऐसी दी जाए ताकि आने वाले भविष्य में कोई भी ऐसी गलती को करने से पहले सौ बार जरूर सोचें.

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