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ताजमहल के रखरखाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई सख्ती, सरकार को दिए यह आदेश

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ताजमहल के रखरखाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वह सोमवार तक यानी कि 30 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट को आखिरकार यह बताए कि ताज के रखरखाव के लिए केंद्र, राज्य सरकार, पुरातत्व विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित किस विभाग का आखिर कौन सा अधिकारी जिम्मेदार हैं. क्या हम इसे सुधारेंगे. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया है कि इसके लिए वह अधिकारियों और अथॉरिटियों को भी नियुक्त करें. जिनका काम ताजमहल के रखरखाव करना होगा, साथ ही उनका काम ताज ट्रेपेजियम जोन को भी विकसित करना होगा. वही सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस लोकुर ने कहा कि इस पूरे मामले में एक अधिकारी के पास यह अधिकार जरूर होने चाहिए और उसी को इसकी जवाबदेही देनी चाहिए.

आगरा के DM की कोर्ट में पेशी के दौरान कोर्ट ने डीएम को भी जमकर फटकार लगाई और कहा कि ताजमहल के पास प्रदूषण फैलने वाली अवैध फैक्ट्रियां चल रही हैं, लेकिन DM कुछ भी नहीं कर रहे. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विजन डॉक्यूमेंट को तैयार करने में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को शामिल नहीं किया गया. ऐसे में क्या इसे अब सही माना जाए. वहीं कोर्ट ने यह भी बताया कि कोई भी संस्था ताजमहल के प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है. हालांकि इसकी जिम्मेदारी किसी ना किसी को तो लेनी पड़ेगी चाहे इसकी जिम्मेदारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या पर्यटन मंत्रालय या फिर कोई और ले.

वहीं कोर्ट ने यह भी कहा कि मैंने इस बात का अनुभव किया है कि जितनी भी संस्थाएं हैं वह ताज महल प्रदूषण नियंत्रण मामले में अपने हाथ धो रही हैं. कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए केंद्र और यूपी सरकार से उन अधिकारियों और प्राधिकरण का नाम बताने के लिए कहा है जिन्हें ताजमहल के रखरखाव और ताज संरक्षित क्षेत्र के पुनर्विकास की जिम्मेदारी दी जा सके.

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 24 जुलाई को ताजमहल सरंक्षण के लिए बन रहे विजन डॉक्यूमेंट का शुरुआती ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दिया था. उस ड्राफ्ट विजन डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि ताजमहल के आसपास के पूरे इलाके को नो प्लास्टिक जोन घोषित कर दिया जाएगा. इसके साथ ही वहां पर बोतलबंद पानी पर भी प्रतिबंध लगाया जाएगा. विजन डॉक्यूमेंट में प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों पर बैन लगाने के लिए बात कही गई है. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने यह भी कहा है कि ताजमहल के प्रदूषणकारी उद्योगों को हटाया जाएगा और यमुना रिवरफ्रंट के साथ पद यात्रियों के लिए सड़क भी बनाई जाएगी. इससे यातायात में थोड़ी कमी आएगी.

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