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ये पाकिस्तानी गलती से आ गया था भारत, बोला – भारत बहुत अच्छा है, मुझे यहीं पर रहने दो

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वैसे देखा जाए तो पड़ोसी देश पाकिस्तान में रहने वाली आवाम को लेकर अधिकतर लोगों का तो यही मानना है कि वह हिंदुस्तान को बिल्कुल भी पसंद नहीं करते हैं. लेकिन वही जब आप इस पाकिस्तानी की बातों को सुन लेंगे तो आप हैरान के हैरान रह जाएंगे. जी हां यह पाकिस्तानी शख्स गलती से भारत की सीमा में आ गया था. जिसके बाद भारतीय सेना ने इसे बंदी बना लिया था. लेकिन वही बाद में भारतीय सेना ने इस शख्स को अटारी-वाघा बॉर्डर पर रिहा कर दिया, लेकिन इस पाकिस्तानी शख्स ने रिहाई के वक़्त जो चौंकाने वाली बात बताई, वह आपको हैरान कर देंगी.

गलती से भारत की सीमा में घुस आए इस 16 वर्षीय शख्स का नाम आसिफ अली है. सोमवार को रिहाई के दौरान आसिफ ने कहा कि मैं गलती से बॉर्डर को पार करके भारत आ गया था. इसके बाद मैं यहां पर करीब 14 महीने रहा, अगर आपसे सच कहूं तो मैं यहां से वापस बिल्कुल नहीं जाना चाहता. भारत मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लगा, मुझे यहां पर नौकरी भी मिल गई थी. इसके बाद आसिफ अली ने कहा कि मैं भारत सरकार से यही अनुरोध करना चाहूंगा कि वह मुझे यहीं पर रहने दे.

और ऐसा पहली बार बिल्कुल नहीं है बिल्कुल सही सुना आपने इससे पहले भी ऐसा हो चुका है. अगर मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इसी साल फरवरी के महीने में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के सहायक कमांडेंट निर्मलजीत सिंह ने एक पाकिस्तानी नागरिक कैलाश राजधन को पाकिस्तानी रेंजर्स के डिप्टी सुपरिटेंडेंट फैजल के हवाले किया था. ये बात अप्रैल 2014 की है जब निर्मलजीत सिंह ने राजधन को जाली भारतीय नोटों के साथ अटारी बॉर्डर से पकड़ा था.

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पाकिस्तान के पंजाब की सिंध प्रांत के गोथकी का रहने वाला कैलाश राजधन अप्रैल 2014 में अपने परिवार के साथ वीजा पर भारत आया हुआ था. वही जब सीमा पर जांच के दौरान उसकी सामानों की जांच की गई तो कस्टम अधिकारियों को उसके सम्मान से भारतीय जाली करेंसी बरामद हुई. इसके साथ ही अमृतसर जेल में बंद पाकिस्तानी नागरिक फातिमा और उसकी बहन मुमताज और उसकी 10 साल की बेटी हिना को 2 नवंबर 2017 को जेल से रिहा कर उसके देश भेज दिया गया था. ये सभी करीब 12 साल तक भारत की जेल में बंद रहे थे. अपने वतन वापसी के वक्त फातिमा ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा किए गए विशेष प्रयासों की वजह से ही आज यह सब हो पाया है.

भारत सरकार ने 25 जून 2017 को 10 पाकिस्तानी कैदियों को रिहा किया था. इन 10 कैदियों में से 4 मछुआरे, एक महिला, पाकिस्तान के छह सिविलियन नागरिक थे. हालांकि उस बच्ची का नाम कैदियों की लिस्ट में शामिल नहीं किया गया था इसी की वजह से बॉर्डर पर तकनीकी अड़चने कुछ समय के लिए उत्पन्न हो गई थी. बाद में उन अधिकारियों ने 5 साल की बच्ची को महिला कैदी के साथ उसके देश भेज दिया.

आपको जानकर हैरानी होगी कि पाकिस्तान के 16 ऐसे कैदी अमृतसर जेल में बंद हैं. जिन्हें उन्हीं के देश ने लेने से साफ इंकार कर दिया है. ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान ने इन्हें अपने देश का नागरिक मानने से मना कर दिया. इस बात की जानकारी पिछले साल केंद्र सरकार ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट को दी थी. जानकारी देते हुए केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट को बताया था कि जेल में करीब 38 विदेशी कैदी बंद हैं, जिनमें से करीब 16 कैदियों को वापस उनके देश भेजा जा चुका है और दो कैदियों की जेल में ही मौत हो चुकी है. बाकी बचे हुए 20 कैदियों में से 16 कैदी पाकिस्तान के हैं दो कैदी बांग्लादेश और एक-एक कैदी नेपाल और म्यांमार के हैं.

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