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यहाँ कुछ ही घंटों में कच्चे केलों को बना दिया जाता है पिले और मीठे, ऐसे होती है ये करामात

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शायद एथेलीन गैस के बारे में कुछ ही लोगों को जानकारी होगी. आज हम आपको एथेलीन गैस का एक करिश्मा और खतरा दोनों के बारे में बताने वाले हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि एथेलीन गैस का उपयोग काफी बड़ी मात्रा में केले को पकाने में किया जा रहा है. यह गैस केलों के लिए इतनी ज्यादा कमाल की साबित होगी इसके बारे में शायद किसी ने नहीं सोचा होगा.

वही मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश के बड़वानी में राजगढ़ रोड पर बने राजलक्ष्मी नामक केला ग्रुप में इस गैस का उपयोग किया जा रहा है. यहां मौजूद कोल्ड स्टोरेज में एथेलीन गैस की मदद से 72 घंटे में ही कच्चे केले को पकाकर पीला और मीठा बना दिया जाता है. जोकि बाजार में बिकने के लिए तैयार हो जाते है.

करीब 20 टन क्षमता वाले इस राइपिंग कोल्ड स्टोरेज में 5 बड़े-बड़े चेंबर बने हुए हैं जिनमें से चार चैंबरों में कच्चे केले को पकाने का काम किया जा रहा है. इन सभी चैम्बरों में गैस की पाइप लाइन लगी हुई है. वही आपको यह भी बता दें कि बुधवार को बुरहानपुर के नजदीक एक कोल्ड स्टोरेज में ब्लास्ट हो जाने की वजह से 3 लोगों की जान चली गई थी.

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मध्यप्रदेश के बड़वानी में मौजूद इस प्लांट के एक चेंबर में 16 किलो गैस 72 घंटे में खपत होती है. इसके अलावा इन चैंबरों में कूलिंग सिस्टम भी एकदम जबरदस्त है. केलों को पकाने के दौरान चैंबरों में बनने वाली कार्बन डाइऑक्साइड गैस को बाहर निकालने के लिए भी ऑटोमेटिक सिस्टम भी लगा हुआ है.

वही बड़वानी कोल्ड स्टोरेज संचालक कहते हैं कि हमारे यहां पर सुरक्षा को लेकर काफी एहतियात बरती जाती है. एथेलीन गैस के यह सिलेंडर कोल्ड स्टोरेज चेंबर से करीब 50 फीट की दूरी पर रखे हुए हैं. यहां से पाइप लाइन के जरिए चैंबरों में गैस जाती है. एक गैस सिलेंडर में 100 किलोग्राम गैस होती है ऐसे में करीब 8 सिलेंडर प्लांट में मौजूद होते हैं. बेशक गैस के सिलेंडर चैंबरों से दूर रखे हो लेकिन वह सभी सिलेंडर कोल्ड स्टोरेज प्लांट के टिन शेड के अंदर ही रखे हैं.

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