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इस शख्स ने घर में लगाया नेट मीटरिंग सिस्टम, 6 हजार की जगह आने लगा 120 रुपए बिजली का बिल

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भोपाल के मालवीय नगर में विजय श्रीवास्तव का घर है. विजय श्रीवास्तव के घर का हर महीने बिजली का बिल 5 से 6 हजार रुपए के बीच आता था, लेकिन वही अब विजय का महीने का बिजली का बिल 100 से 120 रुपए आने लगा. दरअसल अब से करीब 6 महीने पहले श्रीवास्तव ने अपने घर की छत पर 5 किलो वाट क्षमता वाला सोलर बिजली प्लांट लगवा दिया. इसे उन्होंने नेट मीटरिंग से जोड़ दिया और देखा जाए तो राजधानी में इस तरीके से बिजली बचाने वाले विजय श्रीवास्तव अकेले शख्स नहीं हैं. बल्कि एमपी नगर, अरेरा कॉलोनी, होशंगाबाद रोड और चार इमली इलाके में ऐसे कई परिवार मौजूद हैं जो कि अपने घर की छत पर नेट मीटरिंग सोलर सिस्टम लगाकर पैसे और बिजली दोनों की बचत करते हैं. इस सिस्टम की खास बात यह है कि आपको इस सोलर पैनल सिस्टम में भारी-भरकम और महंगी बैटरी की कोई भी आवश्यकता नहीं होती है.

आखिर क्या होता है नेट मीटरिंग

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि नेट मीटरिंग एक तरह का बिलिंग सिस्टम होता है जो कि सोलर पैनल द्वारा पैदा होने वाली बिजली का मेजरमेंट करता है. इसके साथ ही सोलर प्लांट से ग्रिड में जाने वाली और घर में खर्च होने वाली बिजली का पूरा लेखा-जोखा रखता है. आपको नेट मीटरिंग के लिए सोलर सिस्टम के साथ 1 मीटर लगाना पड़ता है जो कि आपको बिजली कंपनी ही देगी.

कैसे मिलता है आम उपभोक्ता को फायदा

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आपको बता दें कि नेट मीटरिंग वाले सोलर सिस्टम को लगाने के लिए कम से कम 100 वर्ग फीट वाली छत की आवश्यकता होती है. 1 किलो वाट बिजली उत्पादन वाले सोलर प्लांट लगाने की कुल लागत 50 हजार (सब्सिडी के साथ) होती है. इससे प्रतिमाह औसतन 125 यूनिट बिजली पैदा होती है. अगर घर में 1 किलो वाट का सोलर प्लांट लगाया जाए तो इससे एक सिंगल परिवार वाले घर की करीब 80% बिजली की जरूरत पूरी हो जाती है. वहीं अगर ज्यादा बिजली बनी या फिर घर में बिजली की उतरी खपत नहीं हुई तो जो भी अतिरिक्त बिजली होगी वह ग्रिड में चली जाएगी. इसके बदले बिजली कंपनी या तो उपभोक्ता को भुगतान कर देगी या फिर बिजली कंपनी उसके बिल में समायोजन कर देगी.

वही आपको यह भी बता दें कि नेट मीटरिंग युक्त सोलर बिजनेस सिस्टम पर होने वाले खर्च का 30 फ़ीसदी राशि केंद्र सरकार द्वारा अनुदान के रूप में दी जाती है. यह अनुदान ऊर्जा विकास निगम के माध्यम से प्रदान किया जाता है.

वही नेट मीटरिंग को लेकर ऊर्जा विकास निगम के एमडी मनु श्रीवास्तव ने बताया कि सोलर सिस्टम के साथ अब लोगों का नेट मीटरिंग को लेकर रुझान काफी बढ़ता जा रहा है, क्योंकि इसकी वजह से बिजली पर खर्चे 80% तक कम हो जाते हैं. वहीं उन्होंने बताया कि भोपाल में 6 महीनों में 46 घरों में 2 किलो वाट से 5 किलो वाट क्षमता के सोलर प्लांट नेट बैटरी के साथ लगाए जा चुके हैं. इतना ही नहीं नेट मीटरिंग लगवाने वाले उपभोक्ताओं को ऊर्जा निगम की तरफ से लागत का 30% अनुदान भी दिया जाता है.

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