Loading...

आपने पहले कभी नही सुनी होगी हनुमान जी से जुड़ी ये अनोखी कथा

0 37

ऋषिनगर में केशवदत्त नाम के ब्राह्मण अपनी पत्नी अंजलि के साथ रहते हैं। उनके घर में किसी भी प्रकार की कमी नहीं थी। पूरे गांव में इनका नाम था और सब लोग उनका सम्मान करते थे। उन्हें केवल एक ही दुख था कि उनके कोई संतान नही थी। इसी चिंता में वो रात दिन डूबे रहते।

दोनों पति पत्नी नियमित रूप से हर मंगलवार को हनुमान मंदिर में पूजा करने जाते और उस दिन व्रत भी रखते। हनुमान जी को भोग लगाने के बाद ही दोनों पति पत्नी अन्न ग्रहण करते थे। एक दिन केशव जंगल मे चला गया तो अंजली अकेले ही हनुमान जी की पूजा करने लगे। लेकिन अंजली हनुमान जी को भोग लगाना भूल गयी और खुद भी भूखी ही सो गई। अगली सुबह जब अंजली को इस बात का पता लगा तो उसने अगले मंगलवार तक भोजन ना करने का प्रण ले लिया। छह दिन तक भुल्हि प्यासी रही अंजली सातवें दिन पूजा के समय बेहोश हो गयी।

फिर एक रात हनुमान जी ने अंजली को स्वप्न में दर्शन दिए और कहा कि में तुम्हारी पूजा पाठ से खुश हूं। और हनुमान जीने एक सुंदर और सुयोग्य पुत्र का वरदान भी दिया। इसके बाद अंजली उठी और हनुमान जी को भोग लगाते हुए खुद भी भोजन किया।

Loading...

हनुमान जी के वरदान के मुताबिक कुछ ही महीनों बाद मंगलवार के दिन अंजली ने एक पुत्र को जन्म दिया। इस बच्चे का नाम मंगलप्रसाद रखा गया। जब कुछ दिनों बाद केशव वापस घर आया तो उसने अंजली से पूछा कि यह कौन है। अंजली ने जब सारी बाते बताई तो केशव दत्त को उस पर विश्वास नहीं हुआ। अब केशव दस अपनी पत्नी के बारे में गलत सोचने लगा और उस मंगलप्रसाद को मारने का विचार बना लिया।

कुछ दिन बाद शाम को मंगल और केशव कुएं पर स्नान करने को गए। मौका देखकर केशव ने मंगल को कुएं में धकेल दिया और अकेले ही घर आ गया। अंजली के पूछने पर केशव ने मना कर दिया कि मंगल मेरे साथ नहीं गया था। तब पीछे से मंगल दौड़ता हुआ आ जाता है। उसी रात केहव के सपने में हनुमान जी दर्शन देते है और कहते है कि मेरे ही वरदान से तुम्हारी पत्नी को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई है। अगली सुबह केशव ने अपनी पत्नी से क्षमा मांगी और तब से अपने बेटे को खूब प्यार करने लगा। और खुशी खुशी पत्नी और बेटे संग रहने लगे।

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.