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भारतीय मूल के एक वैज्ञानिक ने बताया – कैसे ई-कचरे से मिलेगा लोगों को रोजगार

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वर्तमान में कम्प्यूटर, प्रिंटर, मोबाइल, लैपटॉप आदि के नष्ट और खराब ई-कचरे का निस्तारण एक बड़ी चुनौती बन गया है। लेकिन एक भारतीय मूल के ऑस्ट्रेलियाई के अनुसार इस ई-कचरे से काफी लाभ हो सकता है। साथ ही काफी ज्यादा मात्रा में लोगों के लिए रोजगार का अवसर भी हो सकता है। इनके अनुसार भारत मे हर वर्ष 20 लाख टन ई-कचरे के निस्तारण में काफी लोगो को रोजगार मिलेगा साथ ही भारत को काफी लाभ हो सकता है।

सिडनी के नॉर्थ साउथ वेल्स विश्विद्यालय के वैज्ञानिक वीना सहजव्वला के अनुसार ई-कचरे के निस्तारण में रोजगार उपलब्ध करवाना प्रधानमंत्री मोदी के मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट अभियान के तहत है।

इन्होंने एक माइक्रोफॉक्ट्रीज नामक मशीन बनाई है जो इस ई-कचरे से दुबारा काम आने वाली चीजें बना सकती है। जिससे 3डी प्रिटिंग के लिए मिट्टी या प्लास्टिक के फिलामेंट बना सकते हैं। इसी ई-कचरे में से चांदी, सोना, कॉपर और पैलेडियम जैसी धातुओं को भी दुबारा बेचकर पैसा कमाया जा सकता है।

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इनका कहना है कि ई-कचरे का सही तरह से निस्तारण करकर उपयोग में आर वाली चीजें बनाने का यह तरीका भारत के लिए काफी फायदे का सौदा है। इसके साथ ही देश की गली गली में घूमकर कचरा बीनने वाले लोगो को प्रशिक्षित करके रोजगार भी दिया जा सकता है।

भारत मे कबाड़ी ओर कचरा बीनने वालों की कमी नहीं है। यह आपको हर कहीं देखने को मिल जाएंगे। इनमे सभी कूड़े को इक्कट्ठा करके उन्हें अलग अलग करने मि क्षमता होती है। यह क्षमता इस प्लान में काफी मददगार हो सकती है।

वीना के अनुसार इन घुमन्तु कचरा बीनने वालों को सिर्फ थोड़े से प्रशिक्षण की जरूरत है। इसके बाद यह इस कचरे को जलाने की बजाय एक बेहतरीन मशीन की मदद से काम आने वाली चीज बना सकते हैं और यह सब एक सुरक्षित वातावरण में होगा।

इस प्लान से कबाड़ी लोगो कर अलावा कई लोगो को रोजगार मिलेगा। जिससे बेरोजगारी का आंकड़ा भी कम होगा।

वीणा को विज्ञान के सराहनीय योगदान के लिए सन् 2011 में प्रवासी भारतीय सम्मान भी मिल चुका है। वीना ने दिल्ली के सलीमपुर में एक माइक्रोफैक्ट्री लगाने का प्रस्ताव सरकार को दिया है। क्योंकि सलीमपुर में इस ई-कचरे को बड़ी मात्रा में नष्ट किया जाता है।

वीना के अनुसार प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया अभियान को सफल बनाने के लिए इसमे पहले निवेश करने की आवश्यकता है। इसलिए अगर प्रधानमंत्री इस अभियनमे एक और पायदान छूना चाहते है तो इस प्रोजेक्ट में थोड़ा निवेश करने की आवश्यकता है।

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