Loading...

खेतों से निकली भारत की नई उड़नपरी, तोड़ डाले दौड़ के सारे रिकॉर्ड, आइए जानते हैं पूरी खबर…

0 43

कोच निपुण दास ने कहा ”वह भले ही शुरुआत में पीछे चल रही थी, लेकिन मुझे तो पता चल गया था कि आज वह गोल्ड जीतने वाली है”।

हीमा दास की जीत के बाद उनके कोच निपुण दास ने कहा की वे आज बहुत खुश है। गर्व खुशी उससे भी ज्यादा जीत के विश्वास को अपने दिल में समेटे हुए हजारों मील दूर गुहावटी के अंदर हिमा की जीत का जश्न मना रहे उनके कोच निपुण दास आज बेहद खुश नजर आ रहे थे।

किसी अंतर्राष्ट्रीय एथलीट ट्रैक पर भारत का तिरंगा झंडा और विजय के मुस्कान की तस्वीर का भारत के लोगों को बहुत दिनों से इंतजार था। हीमा दास ने यह तस्वीर भारत को दिलाई ।जी हां हीमा दास अब उड़नपरी के नाम से जनि जाने लगी है।

Loading...

इंग्लैंड के टैम्पेयर शहर में 18 साल की हीमा ने iaaf विश्व अंडर-20 में 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में गोल्ड मैडल जीतकर भारत का यह सपना पूरा किया। हीमा इस अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गई है।

हिमा के कोच ने कहा है कि उन्हें यकीन था कि हिमाँ फीनलैंड में कुछ बड़ा करके आएगी। हिमा की इस जीत के चर्चे फिनलैंड से लेकर हिंदुस्तान तक नजर आ रहे हैं। गुहावटी के एक छोटे से गांव में रहकर हिमा ने यह गोल्ड मेडल जीत लिया है। हिमा ने 400 मीटर की दौड़ स्पर्धा में51.46 सेकेंड के अंदर पूरा करके गोल्ड मेडल प्राप्त किया।

अंत में पकड़ती है रफ्तार

हिमा के कोच का कहना है कि शुरुआती 35 सेकंड तक हीमा टॉप 3 में भी नहीं थी। हिंदुस्तान में हिमा को दौड़ते हुए शायद ही किसी ने लाइव देखा होगा। एक शख्स जो की हिमा के कोच है। उन्होंने इस दौड़ को लाइव देखा है। अंतिम क्षणों में रफ्तार पकड़ने वाली हीमा अंत के 100 मीटर तक चौथे स्थान पर थी तो उनके कोच कहते हैं कि उन्हें यकीन हो गया कि इस बार वह गोल्ड लेकर जाएगी। क्योंकि हिमा शुरुआत में थोड़ा धीमा दौड़ती है। अंत में रफ्तार पकड़ कर वह अपनी गति को बढ़ा देती है। उनके कोच का कहना है कि हीमा को मोड में थोड़ी समस्या होती है। लेकिन जब सीधा ट्रैक आ जाए तो। वह तेजी से सबको पीछे छोड़ कर आगे निकल जाती है।

हीमा को बचपन में फुटबॉल खेलने का शौक था

निपुण दास ने 2017 के जनवरी महीने से हीमा को कोचिंग देना शुरु किया था। हिमा गुहावटी में एक कैंप में आई थी। जहां पर उसे दौड़ते देख निपुण को लगा कि हिमा एक अच्छा नाम कमा सकती है। इसलिए उन्होंने हिमा के माता पिता को कहा कि वह हिमा को कोचिंग देंगे। उनके माता पिता राजी हो गए। हीमा के माता पिता गरीब थे। वह खर्चा नहीं उठा सकते थे। इसलिए कोच साहब ने उनको कहा कि खर्च मैं उठा लूंगा। आप तो उसे केवल बाहर आने की मंजूरी दे दे।

हिमा शुरुआत में फुटबॉल की खिलाड़ी थी। और आस-पास के गांव में जिलों में खेल कर 100 – 200 रुपये कमा लेती थी। फुटबॉल में उन्हें खूब दौड़ना पड़ता था। जिसकी वजह से उनका स्टेमिना अच्छा था।वह ट्रैक पर भी अच्छी दौड़ती थी। निपुण का कहना है कि उन्होंने शुरू में हीमाँ को 200 मीटर की तैयारी करवाई। लेकिन बाद में उन्हें लगा कि यह 400 मीटर में अधिक कामयाब होगी।

मिल रही ह बधाइयां

हेमा के पिता खेतों में काम करते थे और इस गोल्ड मेडल जीता था। उनके खेतों में पानी भर जाता था। इस कारण वो कई कई दिन तयारी नही कर पाती थी। पर जब उन्होंने गोल्ड मेडल जीता तो प्रधानमंत्री राष्ट्रपति एवं कई लोगों ने उन्हें बधाइयां दी।

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.