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फर्जी है हरमनप्रीत कौर की BA की डिग्री, DSP नहीं अब बनेंगी केवल सिपाही

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इंडियन महिला टी-20 क्रिकेट टीम की कैप्टन हरमनप्रीत कौर अब विवादों में फंसती नजर आ रही है। दरअसल उनकी BA की मार्कशीट फर्जी होने की पुष्टि हो चुकी है। इससे अब उनकी पंजाब पुलिश की DSP पड़ की नौकरी भी खतरे में है। हरमनप्रीत के बेहतरीन प्रदर्शन की वजह से ही इन्हें रेलवे में नौकरी दी गयी तथा बाद में पंजाब पुलिस में DSP पड़ पर नियुक्ति दी गयी। लेकिन अब इस फर्जी डिग्री के चलते उनका यह DSP का औहदा छीन सकता है। इसके साथ ही सब सरकार उन्हें DSP से सिपाही बनाने पर विचार विमर्श कर रही है।

आपको बता दें, हरमनप्रीत को वर्ष 2016-17 की सर्वश्रेष्ठ महिला प्लेयर भी चुन गया है। और इन्हें अर्जुन अवार्ड भी मिला हुआ है।

TOI में छपी खबर के मुताबिक पंजाब सरकार अब हरमनप्रीत से DSP का पद छीन कर उन्हें सिपाही का पद देने की तैयारी में है। सरकार का कहना है कि हरमनप्रीत सिर्फ 12वीं कक्षा पास है। ऐसे में एक 12वीं पास अभ्यर्थी को केवल सिपाही का पद ही दिया जा सकता है। साथ ही पंजाब सरकार ने हरमनप्रीत से भी जवाब मांगा है कि अगर उन्हें सिपाही के पद पर रहना है तो वो सरकार को बता दें। क्योंकि बिना ग्रेजुएशन के DSP का पद नही दिया जा सकता।

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लेकिन इसी बीच हरमनप्रीत के मैनेजर का कहना है कि इस विषय मे हमे पंजाब पुलिस से कोई लिखित जानकारी नही दी गयी है। साथ ही मैनेजर का कहना है कि यह वही डिग्री है जो रेलवे में नौकरी के दौरान जमा करवाई थी। लेकिन अब यह फर्जी कैसे हो सकती है।

गृह विभाग के प्रधान सचिव कलसी ने पुलिस महकमे को पत्र लिखकर सूचित कर दिया है कि हरमनप्रीत को DSP से हटाकर सिपाही के पद पर लगा दिया जाए। मार्कशीट के फर्जी होने का पता तब चला जब सरकार ने हरमनप्रीत की BA की मार्कशीट को सत्यापन के लिए मार्च में मेरठ के चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में जांच की थी। उस दौरान वहां इस मार्कशीट से संबंधित कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार जीपी श्रीवास्तव का कहना कि इस मार्कशीट के रोल नम्बरो का उल्लेख हमारे यहां के किसी भी दस्तावेजों में नही मिला। इसलिए यह पूरी तरह फर्जी मार्कशीट है।

रेलवे की नौकरी में भी रही विवादों में

आपको बता दें, हरमनप्रीत कौर पहले रेलवे में नौकरी करने के दौरान भी विवादों में रही थी। उस समय रेलवे में हरमनप्रीत को सिर्फ 3 ही साल हुए थे। और उन्होंने रेलवे में 5 साल का बोमद भार रखा था। इसलिए DSP पड़ जॉइन करने के लिए उन्हें 5 साल का वेतन वापस रेलवे को देना था जो हरमनप्रीत नही दे सकी। हरमनप्रीत को DSP का पद पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पुलिस महानिदेशक सुरेश अरोड़ा ने ही जॉइन करवाया था। 5 साल के बांड के बावजूद भी हरमनप्रीत ने रेलवे को त्यागपत्र दे दिया था। जिसकी वजह से मामला काफी गरमा गया था।

हरमनप्रीत के पिता ने भी जांच को बताया गलत

हरमनप्रीत के पिता हरमिंदर सिंह का कहना है कि इसी डिग्री से ही हरमनप्रीत ने रेलवे में जॉइन किया था लेकिन अब यह फर्जी कैसे हो सकती है। हरमिंदर का कहना है कि उन्हें इस जांच पर भरोसा नही है, इसलिए खुद मेरठ जाकर सच्चाई का पता लगाएंगे। लेकिन इस बात का अभी खुलासा नहीं हुआ है कि हरमनप्रीत की यह डिग्री रेगुलर थी या पत्राचार के माध्यम से थी।

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