Loading...

जानें आखिर कौन थे देवरहा बाबा, जिनकी इंदिरा गांधी भी थी बहुत बड़ी भक्त

0 80

देवरहा बाबा एक ऐसे सिद्ध पुरुष थे जो बिना बताए ही दूसरे के बारे में सब कुछ जान लेते थे। बाबा ने अपनी पूरी उम्र तप और सिद्धियों को प्राप्त करने में गुजर दी। तभी तो वो इतने सिद्ध पुरुष थे। दूसरे की बात बिना कहे जानना, यह उनकी सिद्धि का ही प्रभाव था।

भारत मे ऐसे कई ऋषि मुनि ओर संत महात्मा हुए है जिन्होंने तप और साधना करते हुए अनेकों सिद्धियां प्राप्त की। इनमे से एक थे दिव्य पुरुष और संत देवरहा बाबा। देवरहा बाबा सरल और सहज स्वभाव के संत थे। देह दुनिया से बहुत से लोग बाबा जी से मिलने आते थे।

जून 1987 के दौरान एक बार बाबा वृन्दावन के यमुना किनारे लोगो से बातें कर रहे थे। दूसरी ओर राजीव गांधी भी बाबा के दर्शन करने आने वाले थे। इस कारण वहां हैलीपेड बनाने के लिए अफसरों ने एक बबूल के पेड़ के कुछ डाल काटने की बात कही। इस पर बाबा ने अफसरों से इसका कारण पूछा तो अफसरों ने बताया कि प्रधानमंत्री आपसे मिलने आने वाले हैं। तो देवरहा बाबा में कहा कि इसमें आपके प्रधानमंत्री की वाह वाह होगी, उनका नाम होगा, लेकिन सजा इस पेड़ को भुगतनी पड़ेगी। इस प्रकार बाबा ने पेड़ काटने से मना कर दिया।

Loading...

बाबा की इस बात पर अफसरों ने असहमति जताई तो बाबा ने कहा कि कोई बात नहीं, आपके प्रधान मंत्री का कार्यक्रम यहां के लिए टल जाएगा। करीबन दो घंटे बाद रेडियो से मेसेज दिया गया कि प्रधानमंत्री का यह दौरा स्थगित किया जाता है।

बाबा के पास आने वाले सब लोग अचंभित थे कि आखिर बाबा यह सब पहले ही कैसे जान लेते हैं। ध्यान, प्राणायाम ओर समाधि के साथ ही बाबा धर्माचार्य, पण्डितज्ञ और वेदों में भी पारंगत थे। लेकिन इन बाबा का जन्म कब और कहां हुआ यह आज तक कोई नहीं जान पाया। बाबा की उम्र भी आज तक किसी को भी पता ना चली।

यूपी के देवरिया जिले में रहने की वजह से इनका नाम देवरहा बाबा पड़ा। कुछ लोग इन्हें दैवीय शक्तियों की वजह से देवरहा बाबा कहने लगे। आयु, योग, आशीर्वाद, ध्यान और वरदान आदि के कारण लोग इन्हें सिद्ध संत भी कहते थे। अनुयायियों के अनुसार बाबा करीबन 250 से 500 वर्षो तक जिंदा रहे। सम्वत 2047 में अर्थात 19 जून 1990 को बाबा ने अपना शरीर छोड़ दिया था। इस दिन मंगलवार योगिनी एकादशी को बाबा देवलोक हो गए।

इनके चमत्कारों की बात करें तो लोगों का मानना है कि बाबा जल पर भी चल लेते थे। साथ ही प्लाविनी सिद्धि की वजह से किसी भी गन्तव्य पर जाने के लिए बाबा ने कभी भी कोई सवारी नहीं की। बाबा हर साल माघ मेले के पर्याद में जरूर आते थे। इसके साथ ही आधा घंटे तक यमुना के पानी मे बिना सांस लिए रह लेते थे। बाबा ने अपनी उम्र ओर सिद्धियों के लेकर कभी कोई दावे नहीं किए। लेकिन भक्तगण हमेशा उनके इर्द गिर्द रहते थे।

इंदिरा गांधी की बात करें तो देश मे आपातकाल के बाद हुए चुनाव में इंदिरा गांधी हार गई। इस पर वदेवरह बाबा से आशीर्वाद लेने आयी तो बाबा ने अपना पंजा उठाकर आशीर्वाद दिया। इसके बाद इंदिरा गांधी ने कांग्रेस का चुनाव चिन्ह भी हाथ का पंजा तय किया। 1980 में हुए चुनावो में इंदिरा गांधी के इस पंजे वाली कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला और वो देश की प्रधानमंत्री बन गयी। भक्तगणों का मानना है कि किसी भी भक्त की बात उसके मुंह तक आने से पहले ही बाबा वो बात जान लेते थे।

1911 में जॉर्ज पंचम भी भारत आकर बाबा से मिलकर बातचीत की। बाबा देवरिया जिले के मइल गांव में एक आश्रम में रहते थे। यहां बाबा के लिए चार खंभो पर एक मचान बना हुआ था। इसी पर बैठकर बाबा भक्तगणों से मिलते थी। इस गांव में बाबा साल में से आठ महीनों तक रहते थे।

इसके अलावा देवरहा बाबा कुछ समय रामनगर में गंगा के बीच, माघ माह में प्रयाग, फागुन में मथुरा के मठ ओर कुछ समय हिमालय में भी रहते थे। इसके बाद 11 जून 1990 के बाद बाबा ने दर्शन देना बंद कर दिया। बाबा अपने आसान पर ही बैठे रहे। अगले दिन आंधी तूफान शुरू हो गयी। आकाश काले बादलों से भर गया। शाम को बाबा ने अपना शरीर छोड़ दिया।

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.