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दुनिया के इन देशों ने भारतीय मछली और झींगा खाने पर खर्च कर किए 45 हजार करोड़

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अभी तक आपने यही सुना होगा कि दुनिया में भारत का सिर्फ शाकाहारी भोजन ही सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है, लेकिन आपको बता दें कि कुछ ऐसे भी देश है, जहां पर मांसाहारी भोजन भी उतना ही प्रसिद्ध है जितना कि शाकाहारी भोजन है. दरअसल आपको बता दें कि इस बार जो रिपोर्ट सामने आई है वह चौकाने वाली है. रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और यूरोप समेत दुनिया के कई देश भारतीय मछली और झींगा को काफी पसंद करते हैं. इस सब में हैरान करने वाली बात तो यह है कि 1 साल के अंदर इन देशों ने भारतीय झींगा और मछली खाने पर 7.08 अरब डॉलर यानी कि 45,106.89 करोड रुपए खर्च कर दिए हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बीते वित्त वर्ष 2017-18 में भारत ने 7 अरब डॉलर से ज्यादा का समुद्री खाद्य पदार्थ का निर्यात किया. जिसमें खासतौर से झींगा मछली और उसी श्रेणी की अन्य मछलियां शामिल हैं. आपको बता दें कि समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) की विज्ञप्ति के मुताबिक भारत ने वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान 13,77,244 मीट्रिक टन समुद्री खाद्य निर्यात करके करीब 7.08 अरब डॉलर कमा लिए. वही इन्हें अगर भारतीय रुपए में देखा जाए तो यह राशि 45,106.89 करोड रुपए हैं. लेकिन वही वित्त वर्ष 2016-17 में भारत ने 37,870.90 करोड रुपए मूल्य के समुद्री उत्पादों का निर्यात किया था, यानी कि इस बार भारत ने 21.35% की वृद्धि दर्ज की है.

जान लीजिए किन देशों को पसंद आया भारत का यह समुद्री भोजन

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आपकी जानकारी के लिए बता दे कि अमेरिका और दक्षिण पूर्व एशिया ने भारत के समुद्री खाद्य उत्पादों के प्रमुख आयात की अपनी स्थिति एकदम बरकरार रखी. बता दें कि इस सब में अमेरिका की हिस्सेदारी 32.76 प्रतिशत तो वहीं दक्षिण पूर्व एशिया की हिस्सेदारी 31.59 प्रतिशत रही. वहीं इसके बाद यूरोपीय संघ 15.70 प्रतिशत, जापान 6.29 प्रतिशत, मध्यपूर्व 4.10 प्रतिशत और चीन की 3.21 प्रतिशत की हिस्सेदारी रही है.

वही समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. ए. जयतिलक ने कहा कि ‛वैश्विक समुद्री खाद्य व्यापार में लगातार अनिश्चितताओं के सामने भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार में झींगा और अन्य मछलियों की आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी स्थिति को कायम रखने में एक सक्षम रहा है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कई पहलुओं और नीतियों की मदद से हम 2022 तक 10 अरब डॉलर का निर्यात लक्ष्य जरुर प्राप्त कर लेंगे.

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