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गज़ब: सिगरेट के बेकार फिल्टर से 1 साल में कमा डाले 40 लाख, बना दी दो कंपनी

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अगर आपसे कहा जाए कि कोई व्यक्ति सिगरेट के पीछे जो फिल्टर होता है उस फिल्टर के जरिए 1 साल में लाखों रुपए कमा सकता है। तो क्या आपको यकीन होगा शायद आपको नहीं होगा। क्योंकि आपने देखा होगा कि लोग सिगरेट पीने के बाद उसके फिल्टर को वहीं पर फेंक देते हैं। लेकिन आपको बता दें कि नोएडा के अंदर ही बेकार फिल्टर का उपयोग करके सामान बनाने वाले युवाओं ने दो कंपनी खड़ी कर दी हैं और इन दोनों कंपनियों का सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपए के आसपास है।

दरअसल आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इन 2 युवाओं ने साल 2016 में कोड एंटर प्राइजेज एलएलपी नाम की एक कंपनी खड़ी की। इस कंपनी में इन दोनों युवाओं ने सिगरेट के बच्चे हुए और बेकार फिल्टर से तकिए, सोफे के कुशन व चाबी के तरह-तरह के छल्ले को तैयार किया और धीरे-धीरे उन्होंने अपने इस अनूठे प्रयोग को एक कारोबार में बदल दिया। पिछले वित्तीय वर्ष इन दोनों युवाओं की इस कंपनी ने 40 लाख रुपए का टर्नओवर हासिल किया। वही इन दोनों युवाओं की आने वाले समय में उस फिल्टर को एक एयर प्यूरीफायर, चिमनी आदि में उपयोग करने की भी प्लानिंग है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह कंपनी नोएडा के सेक्टर 132 में मौजूद है। और सड़कों पर पड़े हुए सिगरेट के फिल्टर को चुनकर कंपनी तक पहुंचाने के लिए करीब 5000 लोग इस काम से जुड़े हुए हैं। इसके साथ ही आपको यह भी बता दें कि कंपनी इन सिगरेट के फिल्टर को 250 से 400 रुपए प्रति किलो के हिसाब से खरीदती है। इसके साथ ही इस कंपनी ने आसपास में मौजूद सभी सिगरेट व पान की दुकान के पास वी-बिन रखा हुआ है। जिसमें सिगरेट की राख और फिल्टर फेंके जा सकते हैं।

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दरअसल यह कंपनी सबसे पहले सिगरेट के फिल्टर को रसायन से साफ करती हैं। उसके बाद उन्हें बिल्कुल बदबू रहित बना दिया जाता है। फिर धुले हुए उन फिल्टर को सुखाने के बाद उनका उपयोग रुई के रूप में किया जाता है। जिससे तकिए, सोफे के कुशन, आकर्षक चाबी के छल्ले बनाए जाते हैं। इस तरीके से तैयार किए गए सामान की डिमांड इन दोनों ऑनलाइन काफी ज्यादा है। इसके साथ ही इस कंपनी के मालिक अपने सामानों का प्रचार ऑनलाइन सोशल मीडिया साइट्स Facebook और Twitter पर भी काफी कर रहे हैं।

इस कंपनी को शुरू करने वाले 24 वर्षीय नमन गुप्ता ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम किया हुआ है तो वहीं नमन गुप्ता के पार्टनर 28 वर्षीय विशाल कानत ने भी शारदा विश्वविद्यालय से IT में इंजीनियरिंग का कोर्स किया हुआ है। नमन गुप्ता ने बताया कि जब मैं कॉलेज में पढ़ाई किया करते था। तो उनके काफी ऐसे दोस्त हैं जो कि काफी ज्यादा सिगरेट पीते थे। जिससे कि उनके कमरे में ऐश ट्रे बहुत जल्दी भर जाती थी। एक दिन ऐश ट्रे को कूड़ेदान में फेंकते वक्त उनके दिमाग में सिगरेट के फिल्टर को उपयोग करने का ख्याल आ गया। अपने इस आईडिया को उन्होंने अपने दोस्त विशाल के साथ भी साझा किया और इसके बाद दोनों दोस्तों ने मिलकर कोड इंटरप्राइजेज एलएलपी नाम की एक कंपनी बना दी।

इसके साथ ही आपकी जानकारी के लिए यह भी आपको बता दें कि इस कंपनी में फिल्टरों की सप्लाई सिर्फ दिल्ली-एनसीआर से नहीं हो रही है बल्कि जम्मू, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, पटना आदि शहरों से भी यहां पर सिगरेट के यूज किए हुए फिल्टर आते हैं। इसके साथ ही नमन ने यह भी बताया कि शुरुआत के दिनों में सिगरेट के फिल्टर को इकट्ठा करने में काफी परेशानी होती थी। लेकिन बाद में उन्होंने इन फ़िल्टर को इकट्ठा करने के लिए भुगतान को जोड़ दिया है।

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