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हर किसी को समय के साथ मिलता है अपने कर्मों का फल

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यह तो शायद आप सभी लोग जानते होंगे और मानते भी होंगे कि हर किसी इंसान को समय के साथ उसके द्वारा किए गए कर्मों का फल जरूर ही मिलता है। ऐसे ही एक कथा के बारे में आज हम आपको बताने वाले हैं। जिसे आप ध्यान से पढ़िए।

एक बार की बात है जब देवर्षि नारद मुनि बैकुंठ धाम के लिए गए। प्रणाम निवेदित करने के बाद देवर्षि नारद मुनि ने श्री हरि से कहा कि ‛भगवान पृथ्वी पर अब आपका प्रभाव काफी कम होता जा रहा है। जो लोग धर्म के मार्ग पर चल रहे हैं उन लोगों को उनके कर्मों का फल कम प्राप्त हो रहा है। वही जो लोग पाप के भागीदार हैं उन लोगों का भला होता जा रहा है।’

देवर्षि नारद मुनि के इस सवाल का जवाब देते हुए श्री हरि ने उनसे कहा ‛ऐसा बिल्कुल नहीं है देवर्षि, पृथ्वी पर जो कुछ भी होता है वह सब नियति के माध्यम से ही होता है।’

वही देवर्षि नारद मुनि ने कहा कि ‛मैं तो खुद यह सब देखकर आ रहा हूं कि वहां पापियों को तो अच्छा फल प्राप्त हो रहा है और सबका भला करने वाले और धर्म के रास्ते पर चलने वाले लोगों को केवल बुरा ही फल प्राप्त हो रहा है।’

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तो वहीं भगवान ने देवर्षि नारद मुनि से कहा कि ‛आप एक ऐसी ही किसी घटना के बारे में बताओ।’

देवर्षि नारद मुनि ने घटना के बारे में बताते हुए कहा कि ‛अभी मैं एक जंगल से होता हुआ आ रहा हूं। वहां मैंने एक गाय को दलदल में फंसा हुआ देखा और उस गाय को बचाने वाला वहां पर कोई नहीं था तो उसी दौरान एक चोर वहां से गुजर रहा था। उसने गाय को फसा हुआ देखा तो वह वहीं रुक गया और वह चोर उसके ऊपर पैर रखकर दलदल को पार करके चला गया, आगे जाने के बाद उस चोर को सोने से भरी हुई एक थैली मिल गई। उसके थोड़ी देर बाद वहां से एक वृद्ध साधु गुजरा, उस वृद्ध साधु ने दलदल में फंसी उस गाय को बचाने के लिए काफी कोशिश की और उसने अपने पूरे शरीर की जान लगाकर उस गाय को दलदल से निकाल लिया, और मैंने तभी देखा कि उस गाय को दलदल से बचाने के बाद जैसे ही वह वृद्ध साधु थोड़ी सी आगे चला तो उस साधु के पैर में कील चुभ गई। अब आप ही बताइए भगवान यह कैसा न्याय हुआ।’

नारद मुनि की बात सुनने के बाद प्रभु ने कहा कि ‛तुमने वहां पर जो भी होते हुए देखा उसी के आधार पर यह नतीजा निकाल लिया। लेकिन सच्चाई यह है कि उस दिन जो चोर गाय के ऊपर पैर रखकर निकल गया था। उसे उस दिन खजाना मिलना था। लेकिन अपने बुरे कामों की वजह से उसे खजाना उतना नहीं मिला और वही जिस साधु ने गाय को उस दलदल से बाहर निकाला, उस साधु को उस दिन सूली पर चढ़ना था। लेकिन अपने अच्छे कामों की वजह से वो साधु सूली पर चढ़ने से बच गया। इसी वजह से उसे केवल कील चुभने का ही कष्ट झेलना पड़ा।’

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