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​क्या आप जानते हो इन चमत्कारी हिंदू मंदिरों के बारे में, जो पाकिस्तान में स्थित है

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आप सभी लोग भारत में स्थित सभी मंदिरों के बारे में तो जानते हैं। लेकिन हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी कुछ ऐसे हिंदू मंदिर मौजूद हैं। और यह मंदिर भी उतने ही चमत्कारी हैं। जितने कि भारत में स्थित हिंदू मंदिर हैं। आज आपको बताएंगे पाकिस्तान में स्थित कुछ चमत्कारी हिंदू मंदिरों के बारे में।

कटास राज मंदिर, पाकिस्तान

पाकिस्तान के पंजाब चकवाल जिले में स्थित है भगवान शिव का कटास राज नाम का यह मंदिर। वही इस मंदिर के बारे में यह भी कहा जाता है। कि इस मंदिर के प्रांगण में पांडवों ने करीब 4 साल का समय भी बिताया था। वही मान्यता तो यह भी है। कि भगवान शिव की पत्नी सती की मृत्यु के बाद भगवान शिव से बहुत ज्यादा रोए थे। और भगवान शिव के आंसुओं से दो तालाबों का निर्माण भी हुआ था। निर्माण हुए दो तालाबों में से एक तालाब अजमेर के पुष्कर में मौजूद है। और दूसरा पाकिस्तान के कटास राज मंदिर में मौजूद है।


रोहतास फोर्ट मंदिर, झेलम

झेलम के पास इस फोर्ट का निर्माण शेरशाह सूरी ने अपने शासनकाल के दौरान साल 1541 से साल 1548 के बीच कराया था।


हिंगलाज मंदिर, हिंगोल नेशनल पार्क, बलूचिस्तान

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हिंगलाज मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान इलाके के हिंगोल नेशनल पार्क में स्थित है। इस मंदिर को भगवती सती के शक्तिपीठ भी माना जाता है। हिंगलाज मंदिर को नानी मंदिर के नाम से भी लोग जानते हैं। इस मंदिर को लेकर कहा तो यह भी जाता है। कि इस मंदिर का निर्माण माता सती की मृत्यु के बाद भगवान शिव के गुस्से को शांत करने के लिए कराया गया था। वही भगवान विष्णु ने जब माता सती के शरीर को 52 टुकड़ों में बांट दिया। तो उनके शरीर का एक टुकड़ा हिंगलाज मंदिर में भी जाकर गिरा था।


हिंदू मंदिर, थार

दरअसल जैन धर्म के 23वें पैगंबर भगवान पार्श्वनाथ के इस मंदिर का निर्माण एक भारतीय व्यापारी ने करवाया था। लेकिन अब यह मंदिर पूरी तरह से एक खंडहर में परिवर्तित हो चुका है। यह मंदिर गोरी गांव के पास स्थित है। और इस मंदिर का निर्माण 16 वी शताब्दी के आस पास किया गया था।


हिंदू मंदिर, चिन्योट, पंजाब

यह मंदिर चेनाव नदी के किनारे पंजाब के चिन्योट में स्थित है। और यह पाकिस्तान के सबसे पुराने शहरों में भी स्थित है। दरअसल इस मंदिर का निर्माण महाराजा गुलाब सिंह ने करवाया था। वही माना तो यह भी जाता है कि इस मंदिर को दूसरे एंग्लो-सिख युद्ध के दौरान बनवाया गया था।

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