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​राम भक्त हनुमान बनकर लोकप्रिय हुए दारा सिंह से जुड़ी 20 अनसुनी बातें

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कुश्ती के मैदान में ना जाने दुनिया भर के कितने पहलवानों को धूल चटा कर “रुस्तम-ए-हिंद” का खिताब अपने नाम करने वाले दारा सिंह ने फिल्मी दुनिया में भी एक लंबी और कामयाब पारी खेली है। इसके अलावा “रुस्तम-ए-हिंद” दारा सिंह ने मशहूर टीवी धारावाहिक रामायण में हनुमान का किरदार निभाकर टेलीविजन की दुनिया में भी अपना अलग मुकाम बनाया है।

आप नही जानते होंगे दारा सिंह से जुड़ी इन दिलचस्प बातों को :

“रुस्तम-ए-हिंद” धारा सिंह ने धारावाहिक रामायण में राम भक्त हनुमान के किरदार को इतने बढ़िया तरीके से निभाया कि लोग घर-घर उन्हें पहचानने लगे। दारा सिंह के द्वारा कुश्ती में दिए गए योगदान और रामायण मैं निभाया गए राम भक्त हनुमानका किरदार। आज भी उनको हर भारतीय के बीच मैं जीवित किये हुए है।


दारा सिंह का जन्म 19 नवंबर साल 1928 को वीरों की धरती कहे जाने वाले पंजाब के अमृतसर जिले के धरमु चक में हुआ।“रुस्तम-ए-हिंद” दारा सिंह का नाम लेते ही। हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। और गर्दन फक्र से ऊपर उठ जाती है।

दारा सिंह को अपने बचपन से ही पहलवानी करने का शौक था।पहलवानी के अखाड़े में उनकी महारथ से ही उनकी शोहरत धीरे-धीरे हर जगह फैलने लगी।

दारा सिंह ने अपने शुरुआती दौर में कस्बों और शहरों में ही अपनी कला का प्रदर्शन किया।बाद में दारा सिंह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवानों से मुकाबला किया।

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दारा सिंह को ना केवल “रुस्तम ए हिंद” के नाम से जाना जाता था। बल्कि उनको “रुस्तम ए पंजाब” के नाम से भी लोग उन्हें पुकारने लगे।दारा सिंह राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती चैंपियन भी रहे।इसमें उन्होंने कनाडा के चैंपियन जॉर्ज गोंड़ीयाको को हराया।दारा सिंह इससे पहले भारतीय कुश्ती चैंपियनशिप पर अपना कब्जा कर चुके थे।

इसके बाद दारा सिंह ने साल 1968 में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप भी अपने नाम कर ली।कुश्ती के कुछ दिनों बाद ही दारा सिंह को फिल्मों में काम मिलना शुरू हो गया था।वही कहा यह भी जाता है कि फिल्मी पर्दे पर कमीज उतारने वाले “रुस्तम-ए-हिंद” दारा सिंह पहले हीरो थे।

दारा सिंह ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत साल 1952 में आई फिल्म “संगदिल” में एक छोटा सा और अहम रोल निभाकर की थी। इसके बाद दारा सिंह की कई और फिल्में भी आई थी।


दारा सिंह अपने दौर के स्टंट फिल्मों के बहुत बड़े स्टार बन गए थे।दारा सिंह को साल 1962 में आई बाबूभाई मिस्त्री की फिल्म “किंगकोंग” से स्टंट फिल्मों के स्टार के नाम से जाना जाने लगा।

इसके बाद दारा सिंह को उनकी फिल्मों “रुस्तम ए हिंद”, “शेर दिल”, “शंकर खान”, “टार्जन”, “हर्कुलस”, “संग्राम” कि सीरीज ने उन्हें लोकप्रियता के ऊंचे शिखर पर पहुंचा दिया।


दारा सिंह ने साल 1970 में “दारा फिल्म्स” के नाम से अपनी प्रोडक्शन कंपनी शुरू की। अपनी प्रोडक्शन कंपनी में सबसे पहले उन्होंने “भगत धन्ना जाट” नाम की एक पंजाबी फिल्म बनाई।इस फिल्म को दारा सिंह ने डायरेक्ट भी किया था।दारा सिंह ने डायरेक्टर चंद्रकांत की कई पौराणिक फिल्मों में हनुमान और बलराम जैसे किरदार बहुत बढ़िया तरीके से निभाए।

यह तो दारा सिंह की लोकप्रियता का ही असर था।की केदार कपूर ने “रुस्तम-ए-हिंद” दारा सिंह को लेकर। उनके नाम से ही एक फिल्म “दारा सिंह” बना डाली।


आपको बता दें कि दारा सिंह ने करीब 125 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया था।पंजाबी फिल्मों में भी दारा सिंह बहुत लोकप्रिय थे।इसके साथ ही वह करेक्टर आर्टिस्ट के तौर पर भी कई हिट फिल्मों का हिस्सा रहे।जैसे कि “आनन्द”, ”मेरा नाम जोकर”, ”हम एक है“, “मर्द”, “कर्मा”, “धर्मात्मा”, ”कल हो ना हो” और “जब वी मेट” दारा सिंह इन सभी फिल्मों का हिस्सा रहे।

“रुस्तम-ए-हिंद” दारा सिंह ने साल 1973 में आई फ़िल्म “मेरा देश मेरा धर्म” और साल 1978 में आई फ़िल्म “शक्ति” और साल 1982 में आई फ़िल्म “रुस्तम” जैसी हिंदी फिल्में निर्देशित की।दारा सिंह इन सभी फिल्मों के प्रोडूसर भी थे।और दारा सिंह ने बतौर प्रोड्यूसर एक और हिंदी फिल्म “किसान और भगवान” भी बनाई थी।


दारा सिंह फिल्म “भक्ति में शक्ति” के लेखक भी थे। इसके अलावा दारा सिंह पंजाबी फिल्म “सवा लाख से एक लड़ाऊ” के लेखक और निर्माता निर्देशक भी दारा सिंह ही थे।

इसके अलावा दारा सिंह ने 10 और पंजाबी फिल्में भी बनाई थी।“रुस्तम-ए-हिंद” दारा सिंह की अंतिम पंजाबी फिल्म “दिल अपना पंजाबी” थी।भारत सरकार ने रुस्तम-ए-हिंद दारा सिंह को उनकी फिल्म “जग्गा” के लिए। उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार से भी नवाजा था।

बहुत सी फिल्मों में राम भक्त हनुमान का अभिनय कर चुके दारा सिंह ने जब रामानंद सागर के चर्चित टीवी सीरियल रामायण में हनुमान का रोल किया।तो उसके बाद रुस्तम-ए-हिंद दारा सिंह हर घर में पूजनीय हो गए।


उसके बाद दारा सिंह ने साल 1994 में अपने बेटे बिंदु को बतौर हीरो लॉन्च करने के लिए।एक फिल्म “करन” बनाई। यह फिल्म बिल्कुल नहीं चली। लेकिन दारा सिंह के बेटे बिंदु हिंदी फिल्मों के चर्चित कलाकार बन गए।

साल 1983 को दारा सिंह कुश्ती से रिटायर हो चुके थे।इसके बाद दारा सिंह ने सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।इस पहलवान अभिनेता ने 83 वर्ष की उम्र में 12 जुलाई 2012 को मुंबई में अपनी अंतिम सांसे ली।


बेशक चाहे आज दारा सिंह हमारे बीच में मौजूद ना हो।लेकिन आज भी कुश्ती के अखाड़ों में दारा सिंह का नाम एक आदर्श गुरु के रूप में लिया जाता है।

रुस्तम-ए-हिंद दारा सिंह को बेशक अभी तक भारत सरकार की तरफ से भारत रत्न अवार्ड नहीं दिया गया हो।पर वह हर भारतीय के लिए बहुमूल्य रत्नों में से एक हैं।और पूरी दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाला हर भारतीय बड़े फर्क के साथ उनका नाम लेता हैं।

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