Loading...

​जब एक हाथ मे अपने बेटे का हाथ, और दुसरे हाथ मे बेटे को लिए अस्पताल पहुंचा ये पिता

0 10

एक आदमी जब अस्पताल में एक हाथ में अपने बेटे का कटा हुआ हाथ और दूसरे हाथ में उसका बेटा। यह नजारा देखकर सब हैरान रह गए। दरअसल यह पूरा मामला राजस्थान के जोधपुर का है। एक छोटी सी चूक ने इस मासूम बच्चे को जिंदगी भर के लिए अपाहिज बना दिया। इस हादसे में 9 साल के बबलू का पूरा हाथ उसके कंधे से कट गया। 9 साल के बबलू के पिता उसका हाथ लेकर अस्पताल भी गए। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। जिसकी वजह से डॉक्टर उस हाथ को नहीं जोड़ पाए।

यह मामला जोधपुर के चिरढाणी गांव का है। जहां बबलू अपने पिता गेपरराम के साथ अपने खेतों पर गया था। उसके बाद दोनों बाप बेटों ने ट्रॉली में ज्वार का चारा भरा और उसे रस्सियों से अच्छी तरह से बांध दिया।

जब वह खेतों से वापस आ रहे थे। तो रस्सी का एक सिरा नीचे की तरफ लहरा रहा था। वहीं ट्रैक्टर में पीछे बैठे बबलू ने जब यह देखा तो उसे अपने हाथ में लपेट लिया। रास्ते में जब नदी की रपट पर ट्रॉली को हल्का सा झटका लगा। और रस्सी का वह सिरा टायर के नीचे दब गया। जिसको बबलू ने अपने हाथ में लपेटकर पकड़ा हुआ था। अचानक लगे इस झटके से मासूम बबलू का हाथ उसके कंधे से अलग हो गया।

हाथ अलग हो जाने पर उस मासूम बच्चे की बहुत तेज चीज निकल पड़ी। पर ट्रैक्टर चला रहे उसके पिता को कुछ भी पता नहीं चला। उसके बाद बबलू ने अपने पिता से चिल्लाते हुए कहा कि मेरा हाथ पीछे रह गया है। यह सुनते ही उसके पिता ने तुरंत टैक्टर रोका और बबलू का कटा हुआ हाथ और बबलू को लेकर पीपाड़ अस्पताल पहुंचा। यहां से उसे जोधपुर के अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। रेफर किए जाने के बाद गेपरराम एक हाथ में मासूम बबलू का कटा हुआ हाथ और दूसरे में बबलू को लिए। वह जोधपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में पहुँचा। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। जिसके कारण से डॉक्टर बबलू का वह हाथ नहीं जोड़ पाए।

Loading...

बबलू के परिवार पर इससे पहले भी काफी मुसीबतें आ गई थी। बबलू के परिवार में इससे पहले 7 सितंबर को भी सड़क हादसे में उसके दादा मांगीलाल की मौत हो गई थी। और उसके चाचा भी गंभीर रुप से जख्मी हो गए थे। उसके चाचा का आज भी इलाज चल रहा है।

बबलू की ऐसी हालत देखकर हर किसी की आंखें भर आई।

मासूम बबलू जब अपने गांव में हाथ पर पट्टी बांधे पहुंचा। तो मायूसी मासूम बबलू की आंखों में साफ झलक रही थी। मासूम बबलू को ऐसी हालत में देखकर गांव के हर इंसान की आंखें भर आई थी। गांव का हर इंसान अपने अपने तरीके से बबलू को बहला रहे थे। लेकिन मासूम बबलू गुमसुम और चुपचाप ही रहा।

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.